गेहूं की फसल में अगर दाना सही से नहीं भर रहा, बालियां कमजोर रह जाती हैं या पौधा बाहर से हरा दिखने के बावजूद अंदर से कमजोर लग रहा है, तो इसका सबसे बड़ा कारण बोरॉन की कमी हो सकता है। बहुत से किसान इस कमी को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे उपज पर सीधा असर पड़ता है। लेकिन अगर सही समय पर और सही मात्रा में बोरॉन का उपयोग किया जाए, तो गेहूं की पैदावार में साफ फर्क दिखाई देता है।
खेती विशेषज्ञों के अनुसार बोरॉन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, लेकिन इसका असर फसल पर बहुत बड़ा होता है। यह जड़ों की मजबूती, बालियों के विकास और दानों की भराव क्षमता को सीधे प्रभावित करता है।
गेहूं में बोरॉन की कमी के लक्षण क्या होते हैं
अगर गेहूं की फसल में बोरॉन की कमी हो जाए, तो सबसे पहले नई पत्तियों पर असर दिखता है। पत्तियां मुड़ने लगती हैं, शीर्ष भाग सूखने लगता है और पौधे की बढ़वार रुक जाती है। कई बार बालियां ठीक से निकलती नहीं हैं या निकलने के बाद दाने सही से नहीं भरते। ऐसे में किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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बोरॉन का सही समय कौन सा है
गेहूं में बोरॉन का सबसे अच्छा समय पहली सिंचाई के बाद से लेकर बूटिंग स्टेज तक माना जाता है। खासकर जब फसल 30 से 40 दिन की हो जाती है, उस समय बोरॉन का छिड़काव करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। इस स्टेज पर पौधे पोषक तत्वों को तेजी से शोषित करते हैं, जिससे बोरॉन का असर सीधे बालियों और दानों पर पड़ता है।
गेहूं में बोरॉन की सही डोज क्या रखें
खेती विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं में बोरॉन का छिड़काव बहुत सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा नुकसान भी कर सकती है। आमतौर पर बोरॉन 20% का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है।एक एकड़ गेहूं की फसल के लिए 200 से 250 ग्राम बोरॉन 20% को 150–200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जाता है। छिड़काव हमेशा साफ पानी में और सुबह या शाम के समय करना ज्यादा फायदेमंद रहता है।
बोरॉन के साथ कौन-सी सावधानी जरूरी है
बोरॉन का छिड़काव करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसे जरूरत से ज्यादा मात्रा में न डालें। बोरॉन की अधिकता से पत्तियां जल सकती हैं और फसल को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही बोरॉन को किसी भी तेज क्षारीय दवा के साथ मिलाकर छिड़काव न करें। अगर अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व देने हों, तो पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।
बोरॉन देने से गेहूं में क्या फायदे होते हैं
सही समय और सही डोज में बोरॉन देने से गेहूं की जड़ें मजबूत होती हैं, बालियां अच्छी तरह विकसित होती हैं और दानों का भराव बेहतर होता है। इससे हजार दाने का वजन बढ़ता है और कुल पैदावार में साफ बढ़ोतरी देखने को मिलती है। कई किसानों का अनुभव है कि बोरॉन के सही इस्तेमाल से उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
किसानों के लिए खास सलाह
अगर आपकी जमीन हल्की, रेतीली या लंबे समय से एक जैसी फसल पर आधारित है, तो बोरॉन की कमी की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे में मिट्टी परीक्षण कराना सबसे अच्छा तरीका है। मिट्टी की रिपोर्ट के आधार पर बोरॉन का उपयोग करने से नुकसान की बजाय पूरा फायदा मिलता है।
गेहूं की फसल में बोरॉन भले ही एक सूक्ष्म तत्व हो, लेकिन इसका असर पैदावार पर बहुत बड़ा होता है। सही समय पर, सही मात्रा में बोरॉन का छिड़काव करने से गेहूं की बालियां मजबूत होती हैं और दाने भरपूर आते हैं। अगर किसान इस छोटे से पोषक तत्व को गंभीरता से लें, तो उत्पादन और मुनाफा दोनों में साफ बढ़ोतरी संभव है।